Success Story: 9वीं की छात्रा हिमांशी ने किया कमाल, ISRO के प्रतिष्ठित प्रोग्राम में चयन, बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान
Himanshi Sahu Success Story: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की होनहार बेटी हिमांशी साहू ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली हिमांशी का चयन ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम – युविका (YUVIKA) में हुआ है।
देशभर से चुने गए 456 छात्रों में हिमांशी ने अपनी जगह बनाई है। यह सफलता बालोद जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।
ISRO के यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में चयन
हिमांशी साहू ग्राम सिवनी की रहने वाली हैं और सेजेस कन्नेवाडा स्कूल में कक्षा 9वीं की छात्रा हैं। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही हिमांशी ने:
- कक्षा 5वीं में 90% अंक
- कक्षा 8वीं में 96% अंक
हासिल किए थे। उनकी मेहनत, अनुशासन और विज्ञान के प्रति रुचि ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
क्या है ISRO का युविका प्रोग्राम?
ISRO का युविका (Young Scientist Programme) देशभर के स्कूली छात्रों के लिए एक विशेष कार्यक्रम है, जिसमें छात्रों को:
- अंतरिक्ष विज्ञान
- रॉकेट टेक्नोलॉजी
- सैटेलाइट सिस्टम
- वैज्ञानिक रिसर्च
के बारे में जानकारी दी जाती है।
यह प्रोग्राम विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों को प्रेरित करने के लिए शुरू किया गया है।
कलेक्टर ने किया सम्मानित
हिमांशी की सफलता पर जिला प्रशासन ने उन्हें सम्मानित किया।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने संयुक्त जिला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में हिमांशी को:
- प्रशस्ति पत्र
- शॉल
- श्रीफल
भेंट कर सम्मानित किया।
कलेक्टर ने कहा कि हिमांशी की सफलता जिले के अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
हिमांशी ने क्या कहा?
हिमांशी ने कहा:
“मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरा चयन ISRO के प्रतिष्ठित प्रोग्राम में हुआ है। मैं बहुत खुश हूं। लगातार प्रयास करने से ही सफलता मिलती है।”
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने ओलंपियाड, ताइक्वांडो और रेड क्रॉस जैसी गतिविधियों में भाग लिया है।
शिक्षकों और परिवार में खुशी
स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों ने हिमांशी को बधाई देते हुए कहा कि वह हमेशा पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में सक्रिय रही हैं।
माता-पिता ने कहा कि बेटी की इस उपलब्धि से पूरा परिवार गौरवान्वित है।
गांव की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
हिमांशी साहू ने साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर मेहनत और हौसला हो तो छोटे गांव से निकलकर भी अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया तक पहुंचा जा सकता है।



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