Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम को लेकर देश में एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की ओर से वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाने के प्रस्ताव पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे 'आज की नई मुस्लिम लीग' करार दिया।
कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम उसके लिए भावनात्मक विषय है और पार्टी 1937 में कांग्रेस की बैठक में तय किए गए फैसले के अनुरूप ही इसके दो छंदों को गाएगी। वहीं बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत का अपमान किया है और वोट बैंक की राजनीति के चलते ऐसा फैसला लिया गया है।
कांग्रेस ने CWC में क्या फैसला लिया?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद की मौजूदगी में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई थी।
इस बैठक में वंदे मातरम को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा CWC ने उसी पुराने प्रस्ताव पर चर्चा की है और पार्टी अपने मंचों पर उसी व्यवस्था के तहत वंदे मातरम के दो छंदों का इस्तेमाल करेगी।
जयराम रमेश ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम के मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक विवाद बनाया जा रहा है, जबकि देश के सामने युवाओं, परीक्षाओं, आर्थिक मुद्दों और विदेश नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल मौजूद हैं।
नितिन नवीन ने कांग्रेस पर साधा निशाना
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने कथित अपमान को अब एक प्रस्ताव का रूप दे दिया है।
नितिन नवीन के मुताबिक, कांग्रेस की कार्यसमिति ने तय किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। उन्होंने इसे भारत माता और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बलिदान देने वाले लोगों का अपमान बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के आगे राष्ट्र के स्वाभिमान को गिरवी रख दिया है। इसी बयान के दौरान उन्होंने कांग्रेस को 'आज की नई मुस्लिम लीग' भी बताया।
सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस को घेरा
बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुद को देश और संविधान से ऊपर मान रही है।
त्रिवेदी ने कहा कि 1937 में वंदे मातरम को लेकर मुस्लिम लीग की जो आपत्ति थी, कांग्रेस का मौजूदा रुख उसी तरह की जिद को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस फैसले के जरिए खुद को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों को भी स्पष्ट कर दिया है।
वंदे मातरम के कितने छंद हैं?
वंदे मातरम में कुल छह छंद बताए जाते हैं। कांग्रेस का तर्क है कि 1937 में हुई बैठक में तय व्यवस्था के अनुसार सार्वजनिक और राजनीतिक मंचों पर इसके पहले दो छंदों का ही इस्तेमाल किया जाता रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वह इसी ऐतिहासिक निर्णय का पालन कर रही है और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत का अपमान करना नहीं है।
केंद्र के कानून को लेकर भी विवाद
वंदे मातरम को पूरा गाने को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में बदलाव किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके तहत वंदे मातरम के सभी छह छंद गाने को लेकर प्रावधान किए जाने का दावा किया जा रहा है।
इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। बीजेपी इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस पुराने ऐतिहासिक फैसलों और परंपरा का हवाला दे रही है।
कांग्रेस मुख्यालय से लेकर गोवा तक विवाद
वंदे मातरम को लेकर विवाद उस समय भी सामने आया जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में इसे लेकर कथित तौर पर विवाद हुआ। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर आपत्ति जताई गई।
इसके बाद गोवा में कांग्रेस की एक बैठक के दौरान भी वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर विवाद हुआ। उस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद थे।
खरगे ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने वही संस्करण गाया है, जिसे महात्मा गांधी, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने भी गाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह गलत था तो इन नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
फिलहाल वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस जहां अपने पुराने प्रस्ताव और परंपरा को आधार बना रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है।

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