Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को हिंदू धर्म के चार धामों में से एक माना जाता है। यह मंदिर अपनी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ कई रहस्यों और परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक है मंदिर की 22 सीढ़ियों (बैसी पहाचा) में शामिल तीसरी सीढ़ी, जिस पर श्रद्धालु पैर रखने से बचते हैं।
आइए जानते हैं इस मान्यता के पीछे क्या कारण बताया जाता है।
22 सीढ़ियों का क्या है महत्व?
जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं को 22 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं, जिन्हें ओड़िया भाषा में 'बैसी पहाचा' कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये 22 सीढ़ियां मानव जीवन की 22 कमजोरियों, दोषों या विकारों का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इन पर आध्यात्मिक रूप से विजय प्राप्त करने के बाद ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
तीसरी सीढ़ी को क्यों माना जाता है विशेष?
लोकमान्यताओं के अनुसार, मंदिर की तीसरी सीढ़ी को 'यम शिला' कहा जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से लोगों के पाप समाप्त होने लगे, तब यमराज ने भगवान से चिंता व्यक्त की कि लोग आसानी से पापमुक्त हो रहे हैं। तब भगवान जगन्नाथ ने यमराज को मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर स्थान ग्रहण करने का निर्देश दिया।
मान्यता है कि भगवान ने कहा कि जो श्रद्धालु दर्शन के बाद इस शिला पर पैर रखेगा, उसके अर्जित पुण्य समाप्त हो जाएंगे। इसी कारण श्रद्धालु इस सीढ़ी पर पैर रखने से बचते हैं और इसे सम्मानपूर्वक पार करते हैं।
श्रद्धालु आज भी निभाते हैं यह परंपरा
आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के दौरान इस परंपरा का पालन करते हैं। मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग भी इस धार्मिक मान्यता का उल्लेख करते हैं। हालांकि, यह आस्था और परंपरा पर आधारित विश्वास है।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026
रिपोर्ट के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का आयोजन 16 जुलाई से 24 जुलाई तक किया जाएगा। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के दर्शन करते हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि cginsidenews.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

एक टिप्पणी भेजें